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<>मैंने अपना तपस खत्म किया…. मैंने सुबह का खाना बनाया… जब मैं इसे देख रहा था तो मैंने लूटपाट और अभिषेक किया …। 
रेडियो गाता है …. उगते सूरज में-भाग 1 गंडालफ….. मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं … मैं दिल में उतर गया,….. और।।। अचानक।।।। मैंने उपस्थिति और वर्तमान की स्थिति को महसूस किया …. यहाँ और अभी … और बस…… मुझे कुछ महसूस नहीं हुआ… बिना सोचे-समझे,… भावना के बिना,… बिना शरीर के,… समय और स्थान के बिना,… बेदम।।।।।। खालीपन का स्वाद चखा.. बिना ठंड, बिना गर्मी, बिना अच्छाई, बिना बुराई, बिना बदसूरत, बिना सुंदरता, बिना अंधकार, बिना प्रकाश,,,लेकिन इन सबके बिना भी, यह विडेरा वास्तव में सब कुछ है… और यही मैं सब के बारे में था…… सूरज मुझे उत्साह से देख रहा था…… मैं अनंत काल तक ऐसे ही रहता,….. मैं रुक जाता…..!
मैं आज रात ध्यान जारी रखूंगा …
मैं आपको बहुत प्यार से गले लगाता हूं!
